लोहड़ी

लोहड़ी

Lohri 2026: लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख और पारंपरिक त्योहार है. यह पर्व हर साल 13 जनवरी को बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है. मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में इसे बड़ ही धूमधाम से मनाया जाता है. लोहड़ी का त्योहार फसल की कटाई और बुआई की खुशी में मनाया जाता है

लोहड़ी का पर्व क्यों मनाया जाता है

दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से ‘त्योहार’ (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। यज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है।

लोहड़ी से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथाएँ भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से ‘त्योहार’ (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। यज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में ‘खिचड़वार’ और दक्षिण भारत के ‘पोंगल‘ पर भी-जो ‘लोहड़ी’ के समीप ही मनाए जाते हैं-बेटियों को भेंट जाती है।

लोहड़ी से 20-25 दिन पहले ही बालक एवं बालिकाएँ ‘लोहड़ी’ के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं। संचित सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है। मुहल्ले या गाँव भर के लोग अग्नि के चारों ओर आसन जमा लेते हैं। घर और व्यवसाय के कामकाज से निपटकर प्रत्येक परिवार अग्नि की परिक्रमा करता है। रेवड़ी (और कहीं कहीं मक्की के भुने दाने) अग्नि की भेंट किए जाते हैं तथा ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लोगों को बाँटी जाती हैं। घर लौटते समय ‘लोहड़ी’ में से दो चार दहकते कोयले, प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है।[3]

जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है अथवा जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गाँव भर में बच्चे ही बराबर बराबर रेवड़ी बाँटते हैं। लोहड़ी के दिन या उससे दो चार दिन पूर्व बालक बालिकाएँ बाजारों में दुकानदारों तथा पथिकों से ‘मोहमाया’ या महामाई (लोहड़ी का ही दूसरा नाम) के पैसे माँगते हैं, इनसे लकड़ी एवं रेवड़ी खरीदकर सामूहिक लोहड़ी में प्रयुक्त करते हैं। शहरों के शरारती लड़के दूसरे मुहल्लों में जाकर ‘लोहड़ी’ से जलती हुई लकड़ी उठाकर अपने मुहल्ले की लोहड़ी में डाल देते हैं। यह ‘लोहड़ी व्याहना’ कहलाता है। कई बार छीना झपटी में सिर फुटौवल भी हो जाती है। मँहगाई के कारण पर्याप्त लकड़ी और उपलों के अभाव में दुकानों के बाहर पड़ी लकड़ी की चीजें उठाकर जला देने की शरारतें भी चल पड़ी हैं।

लोहड़ी पर कविता

धूप हो चली तीखी-तीखी
आने वाली बसंत बहार,
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

मौसम ने ले ली है करवट
सूरज ने बदली है चाल
कलरव करते पंछी निकले
हवा बजाती सुरमयी ताल,
रहे ठिठुरते जिससे हम सब
सर्दी की अब घटेगी मार
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

रंग-बिरंगी उड़ी पतंगे
आसमान में दौड़ लगातीं
लड़ती-भिड़ती हैं आपस में
कट कर धरती पर आ जातीं,
भाग रहे लेने को बालक
पतंग गिरे जितनी भी बार
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

घर-घर जाकर माँगे सबसे
बच्चे बना-बना कर टोली
दे रहे रेवड़ी, मूंगफली
सुन सब उनकी मीठी बोली,
मिलकर जश्न मनाएंगे अब
सभी बाल हो गए तैयार
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

नव ब्याही जोड़ी हो या फिर
घर में शिशु ने है जन्म लिया
सब नातेदारों ने आकर
उनको है आशीष दिया,
आनंद ही आनंद फैला
उत्सव का छाया है खुमार
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

सभी पड़ोसी हुए इकट्ठे
सबने घेरा एक बनाया
रखे बीच में लकड़ी उपले
आग लगा उसको जलाया,
डालते हैं रेवड़ी-गच्चक
भभक रहे हैं खूब अंगार
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

नाच रहे सब लोकधुनों पर
लोकगीत सब मिल हैं गाते
अच्छाई अपना कर सारे
सन्देश प्रेम का फैलाते,
ठन्डे-ठन्डे इस मौसम में
गर्माहट का होता पसार
ढेरों खुशियाँ लेकर आया
जीवन में लोहड़ी त्यौहार।

लोहड़ी और मकर संक्रांति एक ही समय क्यों मनाई जाती हैं

उत्तर: मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के उपलक्ष्य में मनाई जाती है, जिसे संस्कृत में ‘मकर’ भी कहा जाता है। यह शीत ऋतु के अंत और सूर्य के आगे बढ़ने के साथ लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। भारत में, हम इस त्योहार को पतंग उड़ाकर, भोज आयोजित करके और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से मनाते हैं

लोहड़ी का त्योहार हमें जोश, ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश देता है। इस पर्व की गर्माहट हमें पूरे भारत में कौशल विकास की लौ जगाने के लिए प्रेरित करती है। उमंग, हर्षोल्लास और नई फसल के आगमन के इस पर्व पर हमारी कामना है कि हमारे देश की युवा शक्ति नई क्षमताओं और अवसरों के साथ आगे बढ़े और फलती-फूलती रहे।

Happy Lohri WhatsApp Status Wishes 2026

Lohri, a vibrant harvest festival celebrated in Northern India, radiates joy and warmth. These traditional Lohri wishes capture the essence of the festival, conveying heartfelt blessings for joy, prosperity, and the spirit of togetherness. Share these wishes to spread the festive cheer with your family and friends.

Wishing you a Lohri filled with the warmth of the bonfire, the sweetness of rewari, and the joyous beats of the dhol. Happy Lohri!

May the Lohri fire burn away all your troubles and fill your life with prosperity and happiness. Happy Lohri to you and your family!

As the flames of the bonfire dance high, may your life be filled with the energy of positivity and success. Happy Lohri!

May this festival of Lohri bring joy, love, and abundant harvests into your life. Have a blessed and cheerful Lohri celebration!

On this auspicious occasion of Lohri, may the warmth of the bonfire fill your home with happiness and the aroma of sesame seeds and gur. Happy Lohri!

दोस्तों के लिए लोहड़ी की शुभकामनाएं

मेरी प्यारी दोस्त को लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं, जो हंसी, स्नेह और अलाव के आसपास बिताए गए आनंदमय पलों से भरी हो। लोहड़ी मुबारक!
meree pyaaree dost ko lohadee kee haardik shubhakaamanaen, jo hansee, sneh aur alaav ke aasapaas bitae gae aanandamay palon se bharee ho. lohadee mubaarak!

लोहड़ी का यह त्योहार हमें एक साथ खूबसूरत यादें बनाने के और भी अवसर प्रदान करे। मेरे दोस्त, आपको लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं।
lohadee ka yah tyohaar hamen ek saath khoobasoorat yaaden banaane ke aur bhee avasar pradaan kare. mere dost, aapako lohadee kee haardik shubhakaamanaen.

दोस्ती की गर्माहट और लोहड़ी की लौ की चमक के लिए। हर गुजरते त्योहार के साथ हमारा बंधन और भी मजबूत होता जाए। लोहड़ी मुबारक हो, प्रिय मित्र।
dostee kee garmaahat aur lohadee kee lau kee chamak ke lie. har gujarate tyohaar ke saath hamaara bandhan aur bhee majaboot hota jae. lohadee mubaarak ho, priy mitr.