Kavita Lyrics in Hindi – Latest Posts

  • गुलज़ार की कविता – Gulzar ki Kavitaye – Gulzar Poetry in Hindi

    गुलज़ार की कविता – Gulzar ki Kavitaye – Gulzar Poetry in Hindi हम को मन की शक्ति देना / गुलज़ार पूरा दिन / गुलज़ार रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है / गुलज़ार देखो, आहिस्ता चलो / गुलज़ार ख़ुदा / गुलज़ार इक इमारत / गुलज़ार अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो / गुलज़ार Poetry Of Gulzar […]

  • मेरा कुछ सामान / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    मेरा कुछ सामान / गुलज़ार Lyrics in Hindi (1) जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों जब सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती हो आंखें जब दे रही हों आवाज़ें ठंडी आहों में सांस जलती हो आँख में तैरती हैं तसवीरें तेरा चेहरा तेरा ख़याल लिए आईना देखता […]

  • गुलज़ार / परिचय Lyrics in Hindi

    गुलज़ार / परिचय Lyrics in Hindi null

  • रात पश्मीने की / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    रात पश्मीने की / गुलज़ार Lyrics in Hindi null

  • हम को मन की शक्ति देना / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    हम को मन की शक्ति देना / गुलज़ार Lyrics in Hindi हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें दूसरो की जय से पहले, ख़ुद को जय करें। भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकें दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सके झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें दूसरो की […]

  • पूरा दिन / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    पूरा दिन / गुलज़ार Lyrics in Hindi मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर रोज़ मिलता है मगर हर रोज़ कोई छीन लेता है, झपट लेता है, अंटी से कभी खीसे से गिर पड़ता है तो गिरने की आहट भी नहीं होती, खरे दिन को भी खोटा समझ के भूल जाता हूँ मैं गिरेबान से […]

  • रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है / गुलज़ार Lyrics in Hindi रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता है चाँद की किरणों में वो रोज़ सा रेशम भी नहीं चाँद की […]

  • देखो, आहिस्ता चलो / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    देखो, आहिस्ता चलो / गुलज़ार Lyrics in Hindi देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना, ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं. काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में, ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो, जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा

  • ख़ुदा / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    ख़ुदा / गुलज़ार Lyrics in Hindi पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैंने काले घर में सूरज रख के, तुमने शायद सोचा था, मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे, मैंने एक चिराग़ जला कर, अपना रस्ता खोल लिया. तुमने एक समन्दर हाथ में ले कर, मुझ पर ठेल दिया। मैंने नूह की कश्ती उसके […]

  • इक इमारत / गुलज़ार Lyrics in Hindi

    इक इमारत / गुलज़ार Lyrics in Hindi इक इमारत है सराय शायद, जो मेरे सर में बसी है. सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते हुए जूतों की धमक, बजती है सर में कोनों-खुदरों में खड़े लोगों की सरगोशियाँ, सुनता हूँ कभी साज़िशें, पहने हुए काले लबादे सर तक, उड़ती हैं, भूतिया महलों में उड़ा करती हैं चमगादड़ें जैसे इक […]

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