बस कुछ पल के लिए – Bus Kuch Pal ke Liye | Bhagyashree Sahu

नमस्कार मित्रो आज में आपके साथ अपने एक सब्सक्राइबर या कहे तो एक लेखक भाग्यश्री साहू की लिखी हुई कुछ पंक्तिया आपके साथ सांझा कर रहा हुआ | आशा करता हूँ आपको ये कविता “बस कुछ पल के लिए – Bus Kuch Pal ke Liye” अत्यंत पसंद आएगी | अगर आप भी अपनी कोई कविता, शायरी, लेख प्रकाशित करवाना चाहते है तो मुझे kavitakkosh@gmail.com पर मेल कर सकते है |

बस कुछ पल के लिए

कुछ पल के लिए
अगर यह रात थम जाए,
कल सूरज न आए,
बस वक्त वहीं रुक जाए।

यह शोर शांत हो ,
खामोशियाँ कुछ गुनगुनाएँ,
एँ दिलों की कड़वाहट,
मोहब्बत में बदल जाए।

बस कुछ पल को हम
एक-दूजे से अनजान हो जाएँ,
एँ अपनी ही रूह की
गहराइयों में कहीं खो जाएँ।

एँ इस भाग-दौड़ की दुनिया से
बहुत दूर चले जाएँ,
एँ जहाँ सिर्फ सुकून हो ,
बस वहीं के हो कर रह जाएँ।

एँ हर दुखी मन को सुख का
एक झोंका मिल जाए,
और थमी हुई सांसों को
गहरी राहत मिल जाए।

परेशानियाँ अब ज़िम्मेदारियों में बदल जाएँ,
एँ ज़माने की बेतुकी बातें हम भूल जाएँ।
एँ हर कोई अजनबी बन जाए
खुद से खुद के लिए कुछ सवाल कर पाएँ।

एँ बस कुछ पल के लिए अगर ऐसा हो ,
सोचो , तो कैसा वो पल हो ,
बस कुछ पल के लिए
वो ‘पल’ मिल जाए।
-भाग्यश्री साहू

Bus Kuch Pal ke Liye

Kuch pal ke liye
Agar yeh raat tham jaaye,
Kal suraj na aaye,
Bas waqt wahi ruk jaaye.

Yeh shor shant ho,
Khamoshiyan kuch gunjunaaye,
Eh dilon ki kadvaahat,
Mohabbat mein badal jaaye.

Bas kuch pal ko hum
Ek-doosre se anjaan ho jaaye,
Eh apni hi rooh ki
Gahraaiyon mein kahi kho jaaye.

Eh iss bhag-daude ki duniya se
Bahut door chale jaaye,
Eh jahaan sirf sukoon ho,
Bas wahi ke ho kar rah jaaye.

Eh har dukhi man ko sukh ka
Ek jhonka mil jaaye,
Aur thami hui saanson ko
Gahri raahat mil jaaye.

Pareshaaniyaan ab zimmedaariyon mein badal jaaye,
Eh zamaane ki betuki baatein hum bhool jaaye.
Eh har koi ajnabee ban jaaye
Khud se khud ke liye kuch sawaal kar paaye.

Eh bas kuch pal ke liye agar aisa ho,
Socho, to kaisa wo pal ho,
Bas kuch pal ke liye
Wo ‘pal’ mil jaaye.