जाति का नाग / अरविन्द भारती


जाति का नाग / अरविन्द भारती
मानवता का पाठ
पिता ने उसे पढ़ाया
पर स्कूल के फॉर्म में
हिन्दू मुस्लिम का कॉलम आया
फिर जाति का नाग धीरे से
फुस्कारते हुए मुस्कुराया
हैरान परेशान पिता ने
अपना फ़र्ज़ निभाया

पहले दिन मैडम ने
उसको पाठ पढ़ाया
वो हिन्दू है
राज ये उसको बतलाया

एक दिन बिटिया रानी
रोते रोते घर आई
चमरिया कहके सबने उसकी
खिल्ली खूब उड़ाई

रोते रोते बोली बिटिया
पापा पापा ये चमरिया क्या होता है?
क्या मैं चमरिया हूँ?
मासूम के सवालों से विचलित पिता
उसके सिर पर हाथ फेरता है
और बिटिया रानी सर गोदी में रखकर
बस एक ही रट लगाती रही
मुझे चमरिया नहीं बनना पापा
मुझे चमरिया नहीं बनना।


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