उदासी में कमी कर ली है मैंने / अमित शर्मा ‘मीत’


उदासी में कमी कर ली है मैंने / अमित शर्मा ‘मीत’
उदासी में कमी कर ली है मैंने
ग़मों से आशिक़ी कर ली है मैंने

गुलों के मुस्कुराने का समय है
चमन में वापसी कर ली है मैंने

न जाने कब यक़ीं आएगा उसको
मुहब्बत वाक़ई कर ली है मैंने

अँधेरे को डराने भर की ख़ातिर
ज़रा-सी रौशनी कर ली है मैंने

सफ़र आसान करना है मुझे अब
सो ख़ुद से दोस्ती कर ली है मैंने

दुबारा फिर भरोसा कर लिया है
ये ग़लती तो बड़ी कर ली है मैंने

सदाओं से मिरी अब ठन चुकी है
सो घर में ख़ामुशी कर ली है मैंने

यहाँ चेहरा कोई टिकता नहीं अब
इन आँखों में नमी कर ली है मैंने

अचानक पूछ बैठा मीत ख़ुद से
ये कैसी ज़िन्दगी कर ली है मैंने


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