शिशिर ने पहन लिया / अज्ञेय


शिशिर ने पहन लिया / अज्ञेय
शिशिर ने पहन लिया वसंत का दुकूल
गंध बन उड़ रहा पराग धूल झूल
काँटे का किरीट धारे बने देवदूत
पीत वसन दमक उठे तिरस्कृत बबूल
अरे! ऋतुराज आ गया।


Leave a Reply

Your email address will not be published.