द्वारहीन द्वार / अज्ञेय


द्वारहीन द्वार / अज्ञेय
द्वार के आगे
और द्वार: यह नहीं कि कुछ अवश्य
है उन के पार-किन्तु हर बार
मिलेगा आलोक, झरेगी रस-धार।


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