कज्जल के कूट पर दीप शिखा सोती है कि / अज्ञात कवि (रीतिकाल)


कज्जल के कूट पर दीप शिखा सोती है कि / अज्ञात कवि (रीतिकाल)
कज्जल के कूट पर दीप शिखा सोती है कि ,
श्याम घन मँडल मे दामिनी की धारा है ।
भामिनी के अँक मे कलाधर की कोर है कि ,
राहु के कबँध पै कराल केतु तारा है ।
शँकर कसौटी पर कँचन की लीक है कि ,
तेज ने तिमिर के हिये मे तीर मारा है ।
काली पाटियोँ के बीच मोहनी की माँग है कि ,
ढ़ाल पर खाँड़ा कामदेव का दुधारा है ।

रीतिकाल के किन्हीं अज्ञात कवि का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल महरोत्रा के संग्रह से उपलब्ध हुआ है।


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